सूर्य अर्घ्यमकर संक्रांति पर सूर्य को अर्घ्य कैसे देते हैं?सूर्य अर्घ्य विधि: उदित सूर्य की ओर मुख → तांबे के लोटे को हृदय-नेत्र से ऊपर उठाएं → धीमी धार से जल पृथ्वी पर गिराएं → दृष्टि जलधारा के बीच से सूर्य बिंब पर। तीन बार प्रदक्षिणा → साष्टांग प्रणाम।#सूर्य अर्घ्य विधि#तांबे का लोटा#उदित सूर्य
शिव पूजाशिवलिंग पर कितनी मात्रा में जल चढ़ाना उचित है?जल मात्रा: अविच्छिन्न धारा सर्वोत्तम। नित्य: 1-3 लोटा। मंदिर: 1-2 लीटर+। रुद्राभिषेक: निरंतर धारा। ठंडा जल (गर्म कभी नहीं)। गंगाजल श्रेष्ठ, कोई भी शुद्ध जल उचित। शिव = आशुतोष, श्रद्धापूर्वक एक अंजलि भी पर्याप्त।
शिव पूजा विधिशिवलिंग पर जलधारा किस दिशा से गिरनी चाहिए और क्यों?शिवलिंग पर जलधारा उत्तर दिशा से गिरनी चाहिए। पूर्व दिशा से कभी न चढ़ाएं (शिव का मुख्य द्वार)। जलधारी का मुख उत्तर में हो। तांबे/कांसे के लोटे से छोटी धारा में अर्पित करें। शंख या लोहे के पात्र से जल वर्जित। सोमसूत्र का जल कभी न लांघें।#जलधारा#अभिषेक#दिशा