ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

जलधारा प्रश्नोत्तरी — 3 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित जलधारा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 3 प्रश्न

सूर्य अर्घ्य

मकर संक्रांति पर सूर्य को अर्घ्य कैसे देते हैं?

सूर्य अर्घ्य विधि: उदित सूर्य की ओर मुख → तांबे के लोटे को हृदय-नेत्र से ऊपर उठाएं → धीमी धार से जल पृथ्वी पर गिराएं → दृष्टि जलधारा के बीच से सूर्य बिंब पर। तीन बार प्रदक्षिणा → साष्टांग प्रणाम।

सूर्य अर्घ्य विधितांबे का लोटाउदित सूर्य
शिव पूजा

शिवलिंग पर कितनी मात्रा में जल चढ़ाना उचित है?

जल मात्रा: अविच्छिन्न धारा सर्वोत्तम। नित्य: 1-3 लोटा। मंदिर: 1-2 लीटर+। रुद्राभिषेक: निरंतर धारा। ठंडा जल (गर्म कभी नहीं)। गंगाजल श्रेष्ठ, कोई भी शुद्ध जल उचित। शिव = आशुतोष, श्रद्धापूर्वक एक अंजलि भी पर्याप्त।

जल अभिषेकशिवलिंगजलधारा
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर जलधारा किस दिशा से गिरनी चाहिए और क्यों?

शिवलिंग पर जलधारा उत्तर दिशा से गिरनी चाहिए। पूर्व दिशा से कभी न चढ़ाएं (शिव का मुख्य द्वार)। जलधारी का मुख उत्तर में हो। तांबे/कांसे के लोटे से छोटी धारा में अर्पित करें। शंख या लोहे के पात्र से जल वर्जित। सोमसूत्र का जल कभी न लांघें।

जलधाराअभिषेकदिशा

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।