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त्रिमूर्ति में स्थान प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

त्रिमूर्ति में स्थान से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

वेदांत दर्शन के अनुसार त्रिमूर्ति का क्या समन्वय है?

वेदांत: ब्रह्मा, विष्णु, महेश = एक ही परब्रह्म के तीन कार्य-आधारित रूप। कोई छोटा-बड़ा नहीं। जैसे एक व्यक्ति पिता-अधिकारी-मित्र — वैसे परब्रह्म तीन रूप। शिव-विष्णु परस्पर उपासना करते हैं। इन तीनों में भेद देखना अज्ञान है।

त्रिमूर्ति समन्वयपरब्रह्म एकअद्वैत
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शैव दर्शन के अनुसार विष्णु की उत्पत्ति कैसे हुई?

शैव दर्शन: सदाशिव (निराकार परब्रह्म) → प्रकृति (शिवा/दुर्गा) प्रकट → शिवलोक की रचना → सदाशिव के वाम अंग से विष्णु → विष्णु के नाभि कमल से ब्रह्मा। इस मत में शिव सर्वोपरि, विष्णु उनके पालनहार स्वरूप।

शैव दर्शनसदाशिवविष्णु उत्पत्ति
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वैष्णव दर्शन के अनुसार सृष्टि का आरंभ कैसे हुआ?

वैष्णव दर्शन: प्रलयकाल में नारायण क्षीरसागर में योगनिद्रा में → सृष्टि की इच्छा → नाभि कमल से ब्रह्मा उत्पन्न → ब्रह्मा के क्रोध-संतप्त ललाट से रुद्र (शिव) उत्पन्न। विष्णु ही मूल आधार जिससे ब्रह्मा और शिव की उत्पत्ति हुई।

वैष्णव दर्शननारायणनाभि कमल
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त्रिमूर्ति में विष्णु की क्या भूमिका है?

त्रिमूर्ति: ब्रह्मा (रजोगुण, सृजन), विष्णु (सत्त्वगुण, पालन), शिव (तमोगुण, संहार)। विष्णु की भूमिका = 'पालनकर्ता' और 'धर्म रक्षक'। सत्त्वगुण = शांति, स्थिरता, पोषण और ज्ञान।

त्रिमूर्तिपालनकर्तासत्त्वगुण
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त्रिमूर्ति में स्थान — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर त्रिमूर्ति में स्थान श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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त्रिमूर्ति में स्थान को गहराई से समझने का तरीका

त्रिमूर्ति में स्थान प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।