विस्तृत उत्तर
सनातन दर्शन के मूल में यह मान्यता दृढ़ता से स्थापित है कि परब्रह्म एक ही है, जो कार्य-भेद और गुणों के आधार पर तीन प्रमुख रूपों में विभक्त होता है — सृष्टि की रचना के लिए रजोगुण प्रधान ब्रह्मा, सृष्टि के पालन और पोषण के लिए सत्त्वगुण प्रधान विष्णु, और सृष्टि के संहार या परिवर्तन के लिए तमोगुण प्रधान शिव।
भगवान विष्णु की मुख्य भूमिका 'पालनकर्ता' और 'धर्म रक्षक' की है। सत्त्वगुण शांति, स्थिरता, पोषण और ज्ञान का प्रतीक है, जो सृष्टि को सुचारू रूप से चलाने के लिए अनिवार्य है।
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