विस्तृत उत्तर
महर्लोक में विशुद्ध सत्त्व गुण की पूर्ण प्रधानता है। यह लोक पूर्ण रूप से विशुद्ध सत्त्व गुण से आच्छादित है। सत्त्वगुण ज्ञान, प्रकाश, शांति और पवित्रता का गुण है जो आत्मा को ऊर्ध्वमुखी बनाता है। यहाँ रजोगुण (लोभ, कामना और गति का गुण) तथा तमोगुण (अज्ञान, निद्रा और जड़ता का गुण) का लेशमात्र भी प्रवेश नहीं है। इसी कारण यहाँ भौतिक विकार जैसे रोग, शोक, वृद्धावस्था, थकावट, ईर्ष्या, क्रोध और भूख का पूर्णतः अभाव है। इसके विपरीत स्वर्गलोक में भी रजोगुण का प्रभाव रहता है जिससे वहाँ भी सुख-दुःख का अनुभव होता है और पुण्य समाप्त होने पर वापसी होती है। महर्लोक में सत्त्वगुण की इस प्रधानता के कारण ही यहाँ के निवासी परब्रह्म के ध्यान में पूर्ण रूप से लीन रह सकते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक


