लोकमहर्लोक में कौन से गुण की प्रधानता है?महर्लोक में विशुद्ध सत्त्वगुण की पूर्ण प्रधानता है। रजोगुण और तमोगुण का यहाँ प्रवेश नहीं। इसीलिए यहाँ रोग, शोक, भूख और क्रोध नहीं होते।#महर्लोक#सत्त्वगुण#रजोगुण
लोकमहर्लोक स्वर्गलोक से कैसे अलग है?स्वर्गलोक भौतिक भोग का स्थान है जहाँ पुण्य क्षीण होने पर वापसी होती है। महर्लोक विशुद्ध तपस्या और सत्त्वगुण का लोक है जहाँ एक पूरा कल्प रहा जा सकता है।#महर्लोक#स्वर्गलोक
लोकमहर्लोक में रोग, बुढ़ापा और भूख क्यों नहीं होती?महर्लोक विशुद्ध सत्त्वगुण से आच्छादित है जहाँ रजोगुण और तमोगुण का प्रवेश नहीं। इसलिए यहाँ रोग, बुढ़ापा, भूख, थकावट और क्रोध का पूर्णतः अभाव है।#महर्लोक#रोग#बुढ़ापा
त्रिमूर्ति में स्थानत्रिमूर्ति में विष्णु की क्या भूमिका है?त्रिमूर्ति: ब्रह्मा (रजोगुण, सृजन), विष्णु (सत्त्वगुण, पालन), शिव (तमोगुण, संहार)। विष्णु की भूमिका = 'पालनकर्ता' और 'धर्म रक्षक'। सत्त्वगुण = शांति, स्थिरता, पोषण और ज्ञान।#त्रिमूर्ति#पालनकर्ता#सत्त्वगुण