विस्तृत उत्तर
लिंगोद्भव कथा यह संदेश देती है कि ईश्वर अनंत है और उसे बुद्धि या अहंकार के बल पर नहीं मापा जा सकता; वह केवल समर्पण से ही प्राप्त होता है।
यह कथा शिव के परब्रह्म स्वरूप को सिद्ध करती है और यह स्पष्ट करती है कि त्रिमूर्ति वस्तुतः एक ही परमसत्ता के तीन विभिन्न कार्यशील रूप हैं।
शिव ने सृष्टि के सृजन और पालन के लिए ही ब्रह्मा और विष्णु को अपने से उत्पन्न किया है, जबकि निर्गुण रूप में वह ज्योतिर्लिंग (परब्रह्म) शिव ही हैं।





