विस्तृत उत्तर
इन पौराणिक आख्यानों का दार्शनिक समन्वय (Synthesis) वेद और वेदांत दर्शन में प्राप्त होता है। वेद स्पष्ट करते हैं कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक ही परमेश्वर (परब्रह्म) के तीन कार्य-आधारित रूप हैं। कोई भी एक-दूसरे से न तो छोटा है न बड़ा, और न ही कोई स्वतंत्र सत्ता है।
जैसे एक ही व्यक्ति घर में पिता, कार्यस्थल पर अधिकारी और समाज में मित्र की भूमिका निभाता है, उसी प्रकार एक ही परब्रह्म त्रिगुणमयी माया के संपर्क में आकर भिन्न-भिन्न रूप धारण करता है।
स्वयं शिव विष्णु की आराधना करते हैं और विष्णु शिव की उपासना करते हैं। महाभारत और भागवत पुराण स्पष्ट करते हैं कि जो इन तीनों में भेद देखता है, वह अज्ञानी है।





