विस्तृत उत्तर
जब सनकादिक मुनियों ने हंस रूप भगवान से पूछा, आप कौन हैं, तब भगवान ने अद्वैत का गहरा उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि यदि प्रश्न आत्मा के स्तर पर है, तो सभी आत्माएँ परम सत्य में एक ही चेतना की अभिव्यक्ति हैं; वहाँ मैं और तुम का भेद अर्थहीन है। यदि प्रश्न शरीर के स्तर पर है, तो सभी शरीर पंचमहाभूतों से बने हैं। इसलिए शरीर के आधार पर भी वास्तविक पहचान नहीं मिलती। भगवान ने बताया कि जो कुछ मन, वाणी और इंद्रियों से जाना जाता है, वह भी उसी परम सत्य का प्रकट रूप है। यही आत्मज्ञान का आधार है।
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