विस्तृत उत्तर
तंत्र के गहरे रहस्यों का उद्घाटन तंत्रालोक (अभिनवगुप्त) और कुलार्णव तंत्र में मिलता है:
रहस्य 1 — तंत्र जीवन का पूर्ण स्वीकार है
तंत्रालोक में अभिनवगुप्त कहते हैं — 'तंत्र न तो पलायन है, न निषेध।' जो संसार में है — सुख, दुःख, इच्छा, क्रोध — सब शक्ति के ही रूप हैं। इनका दमन नहीं — रूपांतरण करना है।
रहस्य 2 — शिव और शक्ति एक हैं
कुलार्णव तंत्र: 'शिवः शक्त्या युतो यदि भवति शक्तः प्रभवितुम्। न चेदेवं देवः स्पन्दितुमपि न शक्तः।' — शिव और शक्ति मिलकर ही सृष्टि की शक्ति है। अलग-अलग दोनों अपूर्ण।
रहस्य 3 — साधक स्वयं देवता है
तंत्र का सबसे गहरा रहस्य: 'देवो भूत्वा देवं यजेत्' — देवता बनकर देवता की पूजा करो। पूजा करते समय साधक अपने भीतर देवता को जगाता है।
रहस्य 4 — मंत्र देवता है
महानिर्वाण तंत्र: 'मंत्रः देवताया स्वरूपम्' — मंत्र देवता का स्वरूप है। जब मंत्र जप में साधक पूर्णतः समाहित हो जाता है — तब मंत्र, साधक और देवता एक हो जाते हैं। यही सिद्धि है।
रहस्य 5 — यंत्र ब्रह्मांड का नक्शा है
श्री यंत्र में ब्रह्मांड की संपूर्ण संरचना है। बिंदु = परम ब्रह्म, त्रिकोण = त्रिगुण, चक्र = सृष्टि का चक्र।
रहस्य 6 — ध्वनि ही सृष्टि है
तंत्रालोक: 'नाद ही ब्रह्म है।' सृष्टि ध्वनि से उत्पन्न है — 'ॐ' वह आदि ध्वनि है। मंत्र जप से साधक उस आदि ध्वनि से जुड़ता है।
तंत्र का परम रहस्य
अहं ब्रह्मास्मि' — मैं ही ब्रह्म हूँ; 'शिवोऽहम्' — मैं ही शिव हूँ। जब साधक यह जान लेता है, तब साधना पूर्ण होती है।




