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तंत्र रहस्य📜 तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), कुलार्णव तंत्र, विज्ञान भैरव तंत्र1 मिनट पठन

तंत्र साधना का रहस्य क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र रहस्य: 'देहो देवालयः' — देह ही मंदिर। भोग से मुक्ति — विष से विष। शिव-शक्ति अद्वैत — साधक=शिव, साधना=शक्ति। पंचमकार — अहंकार विसर्जन। विज्ञान भैरव: 'प्रत्येक अनुभव में शिव को देखो।'

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विस्तृत उत्तर

तंत्र के रहस्य का वर्णन तंत्रालोक और विज्ञान भैरव तंत्र में उच्चतम स्तर पर है:

प्रथम रहस्य — देह ही मंदिर

देहो देवालयः प्रोक्तः जीवो देवः सनातनः।' — शरीर मंदिर है, जीव ही देव है।

tंत्र वेदांत की 'देह माया है' की धारणा को अस्वीकार करता है — देह = शक्ति का प्रकटन = पूजनीय।

द्वितीय रहस्य — भोग से मुक्ति

कुलार्णव तंत्र: जो बंधन है — वही मुक्ति का साधन है। विष से विष मारना — भोग से भोग की इच्छा नष्ट।

तृतीय रहस्य — शिव-शक्ति अद्वैत

tंत्रालोक: सृष्टि = शिव (चेतना) और शक्ति (ऊर्जा) का विलास। साधक = शिव, साधना = शक्ति। दोनों एक = मोक्ष।

चतुर्थ रहस्य — पंचमकार

दक्षिण मार्ग में प्रतीकात्मक, वाम मार्ग में साक्षात् — दोनों में उद्देश्य एक: अहंकार विसर्जन और शक्ति जागरण।

विज्ञान भैरव तंत्र

जो भी अनुभव हो — उसमें शिव को देखो।' — यही तंत्र का सर्वोच्च रहस्य।
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शास्त्रीय स्रोत
तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), कुलार्णव तंत्र, विज्ञान भैरव तंत्र
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