विस्तृत उत्तर
तंत्र के रहस्य का वर्णन तंत्रालोक और विज्ञान भैरव तंत्र में उच्चतम स्तर पर है:
प्रथम रहस्य — देह ही मंदिर
देहो देवालयः प्रोक्तः जीवो देवः सनातनः।' — शरीर मंदिर है, जीव ही देव है।
tंत्र वेदांत की 'देह माया है' की धारणा को अस्वीकार करता है — देह = शक्ति का प्रकटन = पूजनीय।
द्वितीय रहस्य — भोग से मुक्ति
कुलार्णव तंत्र: जो बंधन है — वही मुक्ति का साधन है। विष से विष मारना — भोग से भोग की इच्छा नष्ट।
तृतीय रहस्य — शिव-शक्ति अद्वैत
tंत्रालोक: सृष्टि = शिव (चेतना) और शक्ति (ऊर्जा) का विलास। साधक = शिव, साधना = शक्ति। दोनों एक = मोक्ष।
चतुर्थ रहस्य — पंचमकार
दक्षिण मार्ग में प्रतीकात्मक, वाम मार्ग में साक्षात् — दोनों में उद्देश्य एक: अहंकार विसर्जन और शक्ति जागरण।
विज्ञान भैरव तंत्र
जो भी अनुभव हो — उसमें शिव को देखो।' — यही तंत्र का सर्वोच्च रहस्य।





