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आध्यात्मिक महत्व📜 तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), महानिर्वाण तंत्र, कुलार्णव तंत्र2 मिनट पठन

तंत्र साधना का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र का आध्यात्मिक महत्व: देह = मंदिर (मोक्ष का साधन)। ब्रह्मांड = शक्ति — उसे जानना = मुक्ति। समावेशी: 'प्रत्येक में शिव।' स्त्री-शक्ति सम्मान। त्वरित मार्ग। कलियुग में क्रिया-प्रधान। कुलार्णव: 'तंत्रं मोक्षस्य साधनम्।'

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विस्तृत उत्तर

तंत्र साधना का आध्यात्मिक महत्व तंत्रालोक और महानिर्वाण तंत्र में वर्णित है:

1देह को मोक्ष का साधन बनाना

तंत्र का सबसे बड़ा योगदान — 'देहो देवालयः' — देह = मंदिर। अन्य दर्शनों में देह माया/बंधन। तंत्र में देह ही मोक्ष का साधन।

2शक्ति का विज्ञान

tंत्रालोक: ब्रह्मांड = शक्ति का खेल। इस शक्ति को जानना, जगाना, उससे एक होना = आध्यात्मिक मुक्ति।

3समावेशी दृष्टि

तंत्र में कोई वर्जित नहीं — हर वस्तु, हर अनुभव शक्ति का प्रकटन। 'प्रत्येक में शिव को देखना' — यही जागृत साधक की दृष्टि।

4स्त्री-शक्ति का सम्मान

तंत्र में स्त्री = शक्ति का साक्षात् रूप। शाक्त परंपरा में स्त्री = पूजनीय।

5त्वरित मार्ग

महानिर्वाण तंत्र: वर्षों के अभ्यास का फल तंत्र से शीघ्र — किंतु योग्य गुरु के साथ।

6कलियुग में उपयुक्त

तंत्र = क्रिया-प्रधान। कलियुग में क्रिया (जप, पूजा, ध्यान) से सुलभ।

कुलार्णव

तंत्रं मोक्षस्य साधनम्।' — तंत्र मोक्ष का साधन है।
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शास्त्रीय स्रोत
तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), महानिर्वाण तंत्र, कुलार्णव तंत्र
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