विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत और विष्णु पुराण (वैष्णव दर्शन) के मत के अनुसार भगवान नारायण (विष्णु) ही परम कारण और सृष्टि के मूल स्रोत हैं।
सृष्टि के आरम्भ से पूर्व जब सर्वत्र केवल जलमयी प्रलय थी, तब परब्रह्म नारायण क्षीरसागर में शेषशय्या पर योगनिद्रा में लीन थे। जब उनके मन में सृष्टि की इच्छा जागृत हुई, तब उनके नाभि-कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई। तदनंतर, ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि रचना का कार्य आरम्भ किया, तब उनके क्रोध-संतप्त ललाट या भृकुटी से रुद्र (शिव) की उत्पत्ति हुई। इस मत के अनुसार, विष्णु ही वह मूल आधार हैं जिससे ब्रह्मा और शिव की उत्पत्ति हुई।





