विस्तृत उत्तर
सृष्टि निर्माण के प्रारंभिक क्रम के बाद विष्णु की नाभि से दिव्य कमल प्रकट हुआ, जिस पर ब्रह्मा जी का जन्म हुआ।
विष्णु की नाभि से कमल कब निकला को संदर्भ सहित समझें
विष्णु की नाभि से कमल कब निकला का सबसे सीधा सार यह है: सृष्टि आरंभ के बाद।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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विष्णु की नाभि से कमल क्यों निकला?
नाभि-कमल सृष्टि की शुरुआत और ब्रह्मा के जन्म का आधार है।
ब्रह्मा की उत्पत्ति कैसे हुई?
विष्णु की नाभि-कमल से।
सत्यलोक में ब्रह्मा के साथ मोक्ष और महर्लोक से पुनर्जन्म में क्या अंतर है?
जो ऋषि महर्लोक से सत्यलोक पहुँचकर ब्रह्मा के साथ वैकुंठ में प्रवेश करते हैं उन्हें पूर्ण मोक्ष मिलता है। जो नहीं पहुँच पाते वे नई सृष्टि में पुनः सृष्टि चक्र में आते हैं।
नैमित्तिक प्रलय में स्वर्लोक का क्या होता है?
नैमित्तिक प्रलय में ब्रह्मा के एक दिन (कल्प) के अंत में संवर्तक अग्नि से स्वर्लोक भी भस्म हो जाता है। तब स्वर्लोक के निवासी महर्लोक या जनलोक चले जाते हैं।
पुष्कर द्वीप में ब्रह्मा जी का आसन कैसा है?
पुष्कर द्वीप में 10 करोड़ पंखुड़ियों वाला विशाल स्वर्ण कमल है जो ब्रह्मा जी का आसन है। यहाँ मानसोत्तर पर्वत पर इन्द्र, यम, वरुण और चंद्र की राजधानियाँ हैं।
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