विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण के अनुसार नैमित्तिक प्रलय की प्रक्रिया में सात प्रलयंकारी सूर्यों की अग्नि से भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक के भस्म होने के बाद 'सांवर्तक मेघ' प्रकट होते हैं। सांवर्तक मेघ प्रलयकालीन विशेष बादल हैं जो सामान्य बादलों से सर्वथा भिन्न होते हैं। ये प्रलयंकारी बादल अत्यंत विशाल और भयंकर होते हैं जो सौ वर्षों तक निरंतर और भयंकर वर्षा करते हैं। इस महाप्रलय की वर्षा से पूरा कृतक त्रैलोक्य (भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक) एक विशाल जलार्णव (कारण-समुद्र) में डूब जाता है। इसी महाजल में भगवान नारायण शेषनाग पर शयन करते हैं और ब्रह्मा जी के अगले दिन (अगले कल्प) के प्रारंभ होने तक इसी अवस्था में रहते हैं।
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