विस्तृत उत्तर
सुतल लोक में भगवान विष्णु अपने नारायण रूप में रहते हैं। वे चतुर्भुज रूप में हाथ में गदा धारण किए हुए महाराजा बलि के मुख्य द्वार पर रक्षक और द्वारपाल के रूप में खड़े रहते हैं। श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कन्ध, चौबीसवें अध्याय के सत्ताईसवें श्लोक में वर्णन है कि साक्षात् भगवान, जो संपूर्ण जगत के गुरु और स्वयं नारायण हैं, बलि के द्वार पर गदापाणि रूप में स्थित रहते हैं। गदापाणि का अर्थ है हाथ में गदा धारण करने वाले। भगवान अपने भक्त के प्रेम के अधीन होकर एक सामान्य द्वारपाल का कार्य करने में भी संकोच नहीं करते।
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