विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म के विस्तृत और अथाह वाङ्मय — जिसमें वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत और विविध दार्शनिक सूत्र सम्मिलित हैं — में भगवान विष्णु को परब्रह्म, सृष्टि के पालनकर्ता और अनंत कोटि ब्रह्मांडों के नियंता के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
महानारायण उपनिषद के अनुसार, वह परम सत्ता जो प्रत्येक जीव के हृदय में अंतर्यामी रूप में निवास करती है और सम्पूर्ण जगत के कण-कण में समाहित है, वह विष्णु या नारायण ही है। परमात्मा के रूप में विष्णु वह शाश्वत प्रकाश हैं जिससे समस्त विश्व प्रकाशमान होता है ('सर्वमिदं विभाति')।
अतः विष्णु किसी एक विशेष स्थान पर सीमित रहने वाले देव नहीं हैं, बल्कि वे वह अनंत आधार हैं जिस पर यह सम्पूर्ण सृष्टि टिकी हुई है। अथर्ववेद और ब्राह्मण ग्रंथों में भी सृष्टिकर्ता और वेदों की उत्पत्ति के संदर्भ में उस परम सत्ता की ओर संकेत किया गया है जो ब्रह्मांड का मूल है।





