विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु श्राप को रोक सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि यह घटना उनकी व्यापक लीला का भाग बन चुकी थी। उन्होंने सनकादिक मुनियों के श्राप को स्वीकार किया और जय-विजय को विकल्प दिया। भगवान ने यह भी माना कि सेवक का अपराध स्वामी से जुड़ता है, इसलिए उन्होंने मुनियों से विनम्रता दिखाई। जय-विजय का असुर जन्म केवल दंड नहीं था, बल्कि भगवान के अवतारों की युद्ध-लीला और उनके शीघ्र उद्धार का मार्ग भी था। इसलिए विष्णु ने उन्हें बचाने के बजाय लीला को पूर्ण होने दिया।
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