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रामचरितमानस — बालकाण्ड⏱ 1 मिनट पठन

परशुरामजी ने अन्त में श्रीरामजी को कैसे पहचाना?

रामजी के मृदु-गूढ़ वचनों से बुद्धि के परदे खुले। फिर रामजी ने विष्णु धनुष लेकर खींचा — तब परशुरामजी ने प्रभाव जाना।

संक्षिप्त उत्तर

रामजी के मृदु-गूढ़ वचनों से बुद्धि के परदे खुले। फिर रामजी ने विष्णु धनुष लेकर खींचा — तब परशुरामजी ने प्रभाव जाना। पुलकित होकर हाथ जोड़कर बोले — 'जय रघुबंस बनज बन भानू!' — परब्रह्म पहचानकर प्रणाम किया।

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विस्तृत उत्तर

श्रीरामजी ने अत्यन्त विनीत, मृदु और शीतल वाणी से परशुरामजी से बात की। रामजी ने हाथ जोड़कर कहा — 'सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना। बालक बचनु करिअ नहिं काना' — हे नाथ! आप स्वभाव से ही सुजान हैं, बालक के वचनों पर ध्यान नहीं देना चाहिये।

रामजी के कोमल और गूढ़ रहस्ययुक्त वचन सुनकर परशुरामजी की बुद्धि के परदे खुल गये — 'सुनि मृदु गूढ़ बचन रघुपति के। उघरे पटल परसुधर मति के' — श्रीरघुनाथजी के कोमल और रहस्यपूर्ण वचन सुनकर परशुरामजी की बुद्धि के परदे खुल गये।

फिर रामजी ने परशुरामजी से लक्ष्मीपति (विष्णु) का धनुष हाथ में लिया और खींचा — तब परशुरामजी ने श्रीरामजी का प्रभाव जान लिया। उनका शरीर पुलकित और प्रफुल्लित हो गया। हाथ जोड़कर बोले — 'जय रघुबंस बनज बन भानू' — हे रघुकुलरूपी कमलवन के सूर्य! आपकी जय हो! उन्होंने रामजी को परब्रह्म पहचानकर प्रणाम किया।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

परशुरामजी ने अन्त में श्रीरामजी को कैसे पहचाना को संदर्भ सहित समझें

परशुरामजी ने अन्त में श्रीरामजी को कैसे पहचाना का सबसे सीधा सार यह है: रामजी के मृदु-गूढ़ वचनों से बुद्धि के परदे खुले। फिर रामजी ने विष्णु धनुष लेकर खींचा — तब परशुरामजी ने प्रभाव जाना। पुलकित होकर हाथ जोड़कर बोले —...

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रामचरितमानस — बालकाण्ड प्रश्नोत्तर
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