📖
विस्तृत उत्तर
जनलोक में प्रकाश सूर्य या चंद्रमा से नहीं होता। यह लोक वहाँ निवास करने वाले महान योगियों, ऋषियों और कुमारों के आत्मिक तेज और परब्रह्म की ज्योति से प्रकाशित रहता है। जनलोक के निवासियों का प्रभाव और आभा असीमित मानी गई है, जो पूरे लोक को प्रकाशित करती है। इसलिए जनलोक को तेजोमय और प्रकाशमान लोक कहा गया है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?



