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आत्मिक तेज से जुड़े सभी प्रश्न(4)

आत्मिक तेज पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

पुराण माहात्म्य

ब्रह्म-वर्चस्व क्या है?

ब्रह्म-वर्चस्व वह दिव्य आत्मिक तेज है जो व्यक्ति को जीवन में सफलता, स्वास्थ्य, यश, और पुण्य देता है। ब्रह्म का अर्थ है परम और वर्चस् का अर्थ है तेज। यह अदृश्य परंतु शक्तिशाली आत्मिक ऊर्जा है। स्कन्द पुराण के अनुसार जो व्यक्ति द्वितीया श्राद्ध नहीं करता, भगवान शिव उसके ब्रह्म-वर्चस्व यानी तेज और पुण्य का सर्वथा नाश कर देते हैं।

#ब्रह्म वर्चस्व#आत्मिक तेज#पुण्य शक्ति
लोक

जनलोक में प्रकाश कैसे होता है?

जनलोक महान योगियों, ऋषियों और कुमारों के आत्मिक तेज तथा परब्रह्म की ज्योति से प्रकाशित रहता है।

#जनलोक#प्रकाश#आत्मिक तेज
लोक

जनलोक में अंधकार होता है क्या?

नहीं, जनलोक आत्मिक तेज और परब्रह्म की ज्योति से प्रकाशित रहता है।

#जनलोक#अंधकार#प्रकाश
लोक

जनलोक को तेजोमय लोक क्यों कहा गया है?

जनलोक योगियों, ऋषियों और कुमारों के आत्मिक तेज तथा परब्रह्म की ज्योति से प्रकाशित रहता है।

#जनलोक#तेजोमय#आत्मिक तेज
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