विस्तृत उत्तर
हंस अवतार भगवान विष्णु का ज्ञानमय स्वरूप माना जाता है। श्रीमद्भागवत महापुराण के एकादश स्कंध में वर्णित है कि जब सनकादिक मुनियों ने ब्रह्मा जी से मन और विषयों के बंधन से मुक्ति का प्रश्न पूछा, तब ब्रह्मा जी उसका पूर्ण उत्तर न दे सके। उन्होंने भगवान विष्णु का ध्यान किया। तब भगवान एक दिव्य श्वेत हंस रूप में प्रकट हुए और आत्मज्ञान, तुरीय अवस्था, माया, मन और मोक्ष का उपदेश दिया। यह अवतार युद्ध या दैत्य-वध के लिए नहीं, बल्कि अज्ञान का नाश करने और जीव को अपने वास्तविक आत्मस्वरूप का बोध कराने के लिए हुआ था।
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