विस्तृत उत्तर
सत्त्वगुण को मन की निर्मलता और भगवान के दर्शन से जोड़ा गया है। जब भागवत सेवा से अशुभ वासनाएँ मिटती हैं और भगवान के प्रति स्थायी प्रेम होता है, तब रजोगुण और तमोगुण के भाव, जैसे काम और लोभ, शांत हो जाते हैं। चित्त सत्त्वगुण में स्थित और निर्मल होता है। आगे कहा गया कि प्रकृति के तीन गुण सत्त्व, रज और तम हैं, पर मनुष्य का परम कल्याण सत्त्वगुण स्वीकार कराने वाले श्रीहरि से ही होता है। तमोगुण से रजोगुण श्रेष्ठ है और रजोगुण से भी सत्त्वगुण श्रेष्ठ है, क्योंकि वह भगवान का दर्शन कराने वाला है। प्राचीन महात्मा अपने कल्याण के लिये विशुद्ध सत्त्वमय भगवान विष्णु की आराधना करते थे। इसलिए सत्त्वगुण शांति, शुद्धि और भगवान-दर्शन की दिशा में जरूरी है।
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