ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

पौराणिक कथाएँ प्रश्नोत्तर — 15 प्रश्न

पौराणिक कथाएँ से जुड़े 15 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 15 प्रश्न

ब्रह्मा जी का मंदिर केवल पुष्कर में ही क्यों है?

पद्म पुराण की कथा के अनुसार, पुष्कर में यज्ञ के दौरान ब्रह्मा जी ने पत्नी सावित्री की प्रतीक्षा न करके गायत्री से विवाह किया। क्रुद्ध सावित्री ने शाप दिया कि केवल पुष्कर में ही उनकी पूजा होगी, अन्यत्र मंदिर बनाने पर विनाश होगा।

ब्रह्मा जीपुष्कर मंदिरसावित्री शाप
पूरा उत्तर पढ़ें →

संतोषी माता किसकी पुत्री हैं?

लोक मान्यताओं और फिल्म 'जय संतोषी मां' के अनुसार माता संतोषी भगवान गणेश और उनकी पत्नियों (रिद्धि-सिद्धि) की पुत्री हैं। वे विघ्नहर्ता और समृद्धि (रिद्धि-सिद्धि) का परिणाम 'संतोष' हैं।

गणेश की पुत्रीरिद्धि सिद्धिजय संतोषी मां
पूरा उत्तर पढ़ें →

राजा विदुर के पुत्र की कथा कुक्कुटेश्वर लिंग और पशुत्व से मुक्ति से कैसे जुड़ी है?

राजकुमार को मुर्गों के राजा ने पक्षी बनने का शाप दिया था, जिससे मुक्ति उसे कुक्कुटेश्वर लिंग की पूजा से मिली। यह लिंग मनुष्य के भीतर के पशुत्व और तामसिक वृत्तियों को नष्ट कर उसे शिव-चेतना प्रदान करता है।

राजा विदुर पुत्रपशुत्व मुक्तिताम्रचूड़ शाप
पूरा उत्तर पढ़ें →

भगवान शिव ने अपने गणों को काशी क्यों भेजा था?

राजा दिवोदास के निष्कंटक शासन में दोष निकालने और उन्हें काशी से विस्थापित करने के लिए भगवान शिव ने अपने गणों को काशी भेजा था, ताकि शिव पुनः अपनी प्रिय नगरी लौट सकें।

राजा दिवोदासशिवगणों का काशी आगमनस्कंद पुराण
पूरा उत्तर पढ़ें →

राजा दिवोदास के कारण शिव ने काशी क्यों छोड़ी थी?

दिवोदास के राजकाल में शिव मंदराचल गए। काशी की स्थिति जानने को योगिनियाँ, सूर्य, ब्रह्मा भेजे — सब काशी की माया में मुग्ध होकर लौटे नहीं। फिर घंटाकर्ण-महोदर को भेजा — वे भी मोहित होकर रुक गए और शिवलिंग स्थापित कर दिए।

दिवोदासकाशीशिव
पूरा उत्तर पढ़ें →

घंटाकर्ण को मोक्ष कैसे मिला — श्रीकृष्ण और शिव की कथा

शिव ने कहा मोक्ष केवल विष्णु दे सकते हैं। बदरिकाश्रम में श्रीकृष्ण ने घंटाकर्ण को गले लगाया — स्पर्श मात्र से पिशाच योनि छूटी, अठारह भुजाओं वाला शिवगण बना। आज भी बद्रीनाथ (माणा) में रक्षक देवता के रूप में पूजित।

घंटाकर्णमोक्षश्रीकृष्ण
पूरा उत्तर पढ़ें →

घंटाकर्ण कौन थे और उन्होंने कानों में घंटे क्यों बाँधे थे?

घंटाकर्ण शिव का परम भक्त पिशाच था जो विष्णु से घृणा करता था। विष्णु का नाम न सुनने के लिए कानों में घंटे लटकाए — नाम सुनते ही सिर हिलाता, घंटों की ध्वनि नाम को दबा देती। इसी से नाम 'घंटाकर्ण' पड़ा।

घंटाकर्णशिवगणपिशाच
पूरा उत्तर पढ़ें →

कामदेव का पुनर्जन्म कैसे हुआ?

कामदेव ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पुनर्जन्म लिया। शंबरासुर का वध करने के बाद उनकी पत्नी रति (मायावती रूप में) से पुनर्मिलन हुआ।

कामदेव पुनर्जन्मप्रद्युम्नश्रीकृष्ण पुत्र
पूरा उत्तर पढ़ें →

कामदेव को शिव ने क्यों भस्म किया?

देवों के आग्रह पर कामदेव ने तारकासुर वध के लिए शिव की तपस्या भंग करने हेतु पुष्प बाण चलाया। क्रोधित शिव ने तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया। तभी से वे 'अनंग' (शरीर रहित) कहलाए।

कामदेवशिवभस्म
पूरा उत्तर पढ़ें →

विश्वकर्मा देव ने क्या-क्या बनाया?

विश्वकर्मा ने लंका, द्वारका, इंद्रप्रस्थ, इंद्रपुरी, पुष्पक विमान, सुदर्शन चक्र, शिव का त्रिशूल, इंद्र का वज्र और सूर्य का रथ बनाया था।

विश्वकर्मालंकाद्वारका
पूरा उत्तर पढ़ें →

नारद मुनि ने किसे श्राप दिया था?

नारद मुनि ने भगवान विष्णु को श्राप दिया था कि उन्हें पत्नी का वियोग सहना पड़ेगा — जो त्रेतायुग में राम-सीता वियोग के रूप में फलित हुआ। नारद को स्वयं दक्ष प्रजापति का श्राप था कि वे कहीं रुक नहीं सकते।

नारद मुनिश्रापविष्णु
पूरा उत्तर पढ़ें →

इंद्र देव की गलतियाँ और उनका दंड क्या था?

इंद्र की प्रमुख गलतियाँ हैं — अहिल्या के साथ छल (जिससे गौतम ऋषि ने श्राप दिया), ब्राह्मण विश्वरूप का वध (ब्रह्महत्या का पाप), और गोवर्धन प्रसंग में अहंकार। इन्हीं कारणों से उनकी पूजा प्रचलित नहीं है।

इंद्र देवअहिल्याब्रह्महत्या
पूरा उत्तर पढ़ें →

इंद्र देव का वज्र कैसे बना?

इंद्र का वज्र महर्षि दधीचि की अस्थियों से बना था। दधीचि ने वृत्रासुर के वध के लिए अपने प्राण त्यागे और विश्वकर्मा ने उनकी हड्डियों से यह अद्भुत अस्त्र निर्मित किया।

इंद्र वज्रदधीचिवृत्रासुर
पूरा उत्तर पढ़ें →

शनि देव और सूर्य देव में क्यों नहीं बनती?

शनि जन्म के समय काले रंग के कारण सूर्य ने उनका अपमान किया था। इसी अपमान के कारण दोनों में वैमनस्य रहा। ज्योतिषीय रूप से भी दोनों परस्पर शत्रु ग्रह हैं।

शनि सूर्यपिता पुत्रवैमनस्य
पूरा उत्तर पढ़ें →

शक्तिपीठ कैसे बने थे?

दक्ष के यज्ञ में पति-अपमान सहन न कर पाने पर माता सती ने देह त्याग किया। शिवजी के तांडव से सृष्टि संकट में आई तो भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े किए। जहाँ-जहाँ ये अंग गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ बने।

शक्तिपीठमाता सतीदक्ष यज्ञ
पूरा उत्तर पढ़ें →

पौराणिक कथाएँ — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पौराणिक कथाएँ श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

पौराणिक कथाएँ को गहराई से समझने का तरीका

पौराणिक कथाएँ प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

15 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।