विस्तृत उत्तर
शनि देव और सूर्य देव के बीच वैमनस्य की कथा स्कंद पुराण और अन्य पुराणों में विस्तार से मिलती है। जब शनि देव का जन्म हुआ तो उनका वर्ण काला था क्योंकि उनकी माता छाया ने गर्भकाल में शिव की कठोर तपस्या की थी। सूर्य देव इतने तेजस्वी हैं कि उनका पुत्र काले रंग का कैसे हो सकता है — यह सोचकर उन्हें अपनी पत्नी छाया और पुत्र शनि पर संदेह हुआ। उन्होंने दोनों का अपमान किया। इस अपमान से आहत शनि देव ने जब अपने पिता को क्रोधित दृष्टि से देखा तो कहा जाता है कि उस दृष्टि मात्र से सूर्य का रंग काला पड़ गया और सृष्टि में अंधेरा छा गया। बाद में छाया के श्राप से भी सूर्य को कुष्ठ रोग हुआ। एक अन्य प्रसंग के अनुसार सूर्य ने शनि को अपने घर कुंभ राशि में अलग कर दिया, जिससे शनि और छाया का क्रोध और बढ़ा। ज्योतिषीय दृष्टि से भी सूर्य और शनि परस्पर शत्रु ग्रह माने जाते हैं — जहाँ सूर्य की सीमा समाप्त होती है, वहाँ से शनि का प्रभाव शुरू होता है। शनि को कर्म का देवता और न्यायाधीश माना गया है, जो पिता सूर्य को भी उनके कर्मों का फल देते हैं।





