विस्तृत उत्तर
भगवान विश्वकर्मा को देवशिल्पी और विश्व के प्रथम इंजीनियर-वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। पुराणों में उनके अनेक अद्भुत निर्माणों का वर्णन है। नगरों के निर्माण में सत्ययुग में उन्होंने इंद्रपुरी (स्वर्गलोक) और कुबेरपुरी बनाई। त्रेतायुग में उन्होंने सोने की लंका का निर्माण किया था — यह भव्य नगर मूलतः कुबेर के लिए बना था, किंतु रावण ने इसे छीन लिया। द्वापरयुग में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के लिए समुद्र में स्थित द्वारका नगरी का निर्माण किया। इसके अतिरिक्त पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ और हस्तिनापुर के निर्माण का श्रेय भी इन्हें दिया जाता है। यमपुरी और वरुणपुरी भी उनकी रचना हैं। देवताओं के दिव्य अस्त्र-शस्त्रों में भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल, इंद्र का वज्र, यमराज का कालदंड और कर्ण का कुंडल विश्वकर्मा ने ही बनाए थे। पुष्पक विमान — जिसे विश्व का पहला विमान कहा जाता है — भी उन्हीं की रचना है। इसके साथ ही सूर्य देव का दिव्य रथ, देवताओं के आभूषण और यज्ञवेदी का निर्माण भी विश्वकर्मा ने किया था।




