विस्तृत उत्तर
सुदर्शन चक्र के निर्माण के विषय में पुराणों में दो प्रमुख कथाएं मिलती हैं, जो दोनों प्रामाणिक मानी जाती हैं।
पहली कथा शिव पुराण के अनुसार — शिव महापुराण की कोटिरुद्र संहिता में कहा गया है कि सुदर्शन चक्र का निर्माण स्वयं भगवान शिव ने किया था। उन्होंने इसे तपोबल से निर्मित करके मंत्रमय और सर्वाधिक शक्तिशाली बनाया था।
दूसरी कथा विश्वकर्मा के संदर्भ में मिलती है — देवशिल्पी विश्वकर्मा की पुत्री संजना का विवाह सूर्यदेव से हुआ था, परंतु सूर्य के प्रचंड तेज और उष्णता को संजना सहन नहीं कर पाती थीं। तब विश्वकर्मा ने सूर्य के तेज को कम करने के लिए उन्हें खराद पर चढ़ाया। सूर्य के तेज से जो पवित्र धूल बची, उससे विश्वकर्मा ने तीन दिव्य वस्तुएं बनाईं — पहली पुष्पक विमान (कुबेर के लिए), दूसरी भगवान शिव का त्रिशूल और तीसरी भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र।
इस प्रकार दोनों कथाओं को एक साथ देखें तो — विश्वकर्मा ने सूर्य के तेज से इसे बनाया और शिव ने उसे धारण करके भगवान विष्णु को दिया।





