विस्तृत उत्तर
विश्वकर्मा देवताओं के वास्तुकार और शिल्पकार हैं जिन्होंने स्वर्ग, लंका, द्वारका, इंद्रप्रस्थ आदि का निर्माण किया। कारीगरों, इंजीनियरों, शिल्पकारों और कारखाना मालिकों के आराध्य देवता हैं।
विश्वकर्मा पूजा प्रतिवर्ष 17 सितंबर (कन्या संक्रांति) को मनाई जाती है। कारखानों, दुकानों और कार्यशालाओं में मशीनों और औजारों की पूजा की जाती है। विश्वकर्मा चित्र स्थापित कर फूल, फल, मिठाई अर्पित करें। 'ॐ विश्वकर्मणे नमः' मंत्र जपें। हवन करें (यदि संभव)। पतंग उड़ाने की परंपरा (कुछ क्षेत्र)।
इस दिन मशीनें और औजार बंद रखकर उनकी सफाई और पूजा करते हैं जो कृतज्ञता का प्रतीक है — जिन उपकरणों से जीविका चलती है उनका सम्मान।





