विस्तृत उत्तर
अलकनंदा गंगा की दक्षिण दिशा में प्रवाहित होने वाली धारा है। शास्त्रों के अनुसार इसी अलकनंदा की धारा को महाराज भगीरथ की घोर तपस्या के कारण भगवान शिव ने अपनी जटाओं में धारण किया था। भगवान शिव ने इसे इसलिए रोका था ताकि इसके प्रचंड ब्रह्माण्डीय वेग से भूलोक नष्ट न हो जाए और रसातल में न चला जाए। बाद में शिव जी द्वारा प्रसन्न होकर मुक्त किए जाने पर यह सात धाराओं में बँटकर भारतवर्ष से होते हुए दक्षिण सागर में जा मिली। महाराज भगीरथ के रथ का अनुगमन करने के कारण ही अलकनंदा के इस पृथ्वी पर प्रवाहित होने वाले स्वरूप को 'भागीरथी' कहा गया। इस प्रकार अलकनंदा और भागीरथी एक ही गंगा के दो नाम हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक



