विस्तृत उत्तर
सुदर्शन चक्र का निर्माण देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने किया था। विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा का विवाह सूर्य देव से हुआ था परंतु सूर्य देव का तेज इतना प्रचंड था कि संज्ञा उनके समीप रह पाने में असमर्थ थीं। पुत्री की पीड़ा दूर करने के लिए विश्वकर्मा ने सूर्य देव के अतिरिक्त तेज को एकत्र किया और उस तेज से तीन अलौकिक वस्तुओं का निर्माण किया — पहला पुष्पक विमान, दूसरा भगवान शिव का त्रिशूल, और तीसरा भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र। इस प्रकार सुदर्शन चक्र सूर्य के दिव्य तेज से निर्मित है।
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