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विष्णु अस्त्र शस्त्र प्रश्नोत्तर — 21 प्रश्न

विष्णु अस्त्र शस्त्र से जुड़े 21 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 21 प्रश्न

सुदर्शन चक्र किसने बनाया था?

शिव पुराण के अनुसार सुदर्शन चक्र भगवान शिव ने बनाया था। एक अन्य कथा में देवशिल्पी विश्वकर्मा ने सूर्य का तेज घटाकर बची धूल से पुष्पक विमान, त्रिशूल और सुदर्शन चक्र — तीन दिव्य वस्तुएं बनाईं।

सुदर्शन चक्र निर्माणविश्वकर्मासूर्य तेज
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विष्णु जी को सुदर्शन चक्र कैसे मिला?

विष्णु ने कैलाश पर शिव के सहस्त्र नामों से पूजा की, एक कमल कम होने पर अपना नेत्र अर्पित किया। इस अटूट भक्ति से शिव प्रकट हुए और अजेय सुदर्शन चक्र भेंट किया।

सुदर्शन चक्र प्राप्तिविष्णु शिव तपस्याकमल नेत्र अर्पण
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विष्णु जी के धनुष का नाम क्या है?

विष्णु जी के धनुष का नाम 'शार्ङ्ग' (शारंग) है। इसे विश्वकर्मा ने बनाया था। विष्णु → ऋचिक → परशुराम → राम → वरुण → कृष्ण — यह परंपरा चली।

विष्णु धनुषशार्ङ्गसारंग
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सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध क्यों किया?

राजसूय यज्ञ में शिशुपाल ने भरी सभा में कृष्ण का 101वीं बार अपमान किया। कृष्ण ने बुआ को दिया 100 अपराध क्षमा का वचन पूरा करने के बाद सुदर्शन चक्र से उसका वध किया।

शिशुपाल वधसुदर्शन चक्र100 अपराध
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सुदर्शन चक्र में कितनी आरियां होती हैं?

शिव पुराण के अनुसार सुदर्शन चक्र में 12 अरे और 9 नाभियाँ हैं। इन 12 अरों में बारह देव-शक्तियाँ, 12 राशियाँ और 12 मास समाहित हैं। कुछ ग्रंथों में 108 धाराओं का भी उल्लेख है।

सुदर्शन चक्रबारह अरेनौ नाभियाँ
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पांचजन्य शंख क्या है?

पांचजन्य विष्णु और कृष्ण का दिव्य शंख है। कृष्ण ने गुरु पुत्र को बचाने समुद्र में शंखासुर राक्षस का वध किया और उसके शरीर से बने शंख को पांचजन्य नाम दिया। महाभारत में इससे युद्ध घोषित किया।

पांचजन्य शंखशंखासुरकृष्ण
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विश्वकर्मा ने सुदर्शन चक्र कैसे बनाया?

विश्वकर्मा ने अपनी पुत्री संजना की शिकायत पर सूर्य का तेज घटाया। उस तेज से निकली दिव्य धूल से पुष्पक विमान, शिव का त्रिशूल और विष्णु का सुदर्शन चक्र — ये तीन दिव्य वस्तुएं बनाईं।

विश्वकर्मासुदर्शन चक्र निर्माणसंजना
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शार्ङ्ग धनुष क्या है?

शार्ङ्ग विष्णु का दिव्य धनुष है जिसे विश्वकर्मा ने बनाया था। विष्णु के विभिन्न अवतारों के माध्यम से यह ऋचिक → परशुराम → राम → वरुण → कृष्ण तक पहुँचा।

शार्ङ्ग धनुषसारंगविष्णु
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कौमोदकी गदा क्या है?

कौमोदकी विष्णु की दिव्य गदा है। यह भयंकर गर्जना करती है और पर्वत तक चूर कर देती है। महाभारत में अग्निदेव ने खांडव-दहन के बदले यह कृष्ण को दी। यह शक्ति और अधर्म-दमन का प्रतीक है।

कौमोदकी गदाविष्णुदिव्य गदा
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शिव जी ने सुदर्शन चक्र विष्णु को क्यों दिया?

दैत्यों के अत्याचार से देवता विवश हो गए। विष्णु ने कैलाश पर शिव की तपस्या की और एक कमल की कमी पर अपना नेत्र अर्पित किया। इस अटूट भक्ति से प्रसन्न शिव ने दैत्य-संहार के लिए विष्णु को सुदर्शन चक्र भेंट किया।

सुदर्शन चक्रशिव विष्णुकमल नेत्र
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विष्णु जी के पास कौन-कौन से अस्त्र-शस्त्र हैं?

विष्णु के प्रमुख अस्त्र-शस्त्र हैं — सुदर्शन चक्र, कौमोदकी गदा, शार्ङ्ग धनुष, नंदक तलवार और पांचजन्य शंख। दिव्यास्त्रों में नारायणास्त्र और वैष्णवास्त्र भी प्रसिद्ध हैं।

विष्णु अस्त्रसुदर्शन चक्रकौमोदकी गदा
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नंदक तलवार क्या है विष्णु की?

नंदक (नंदकी) विष्णु की दिव्य तलवार (खड्ग) है। इसका अर्थ है आनंद देने वाली। यह ज्ञान और विवेक का प्रतीक है और अज्ञान के अंधकार को नष्ट करती है।

नंदक तलवारविष्णु खड्गनंदकी
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सुदर्शन चक्र का क्या अर्थ है?

'सुदर्शन' = 'सु' (शुभ) + 'दर्शन' (दृष्टि)। अर्थ है — शुभ दृष्टि या मंगलमय साक्षात्कार। यह विष्णु की शुभ दृष्टि और न्याय की शाश्वत शक्ति का प्रतीक है।

सुदर्शन अर्थसु दर्शनशुभ दृष्टि
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सुदर्शन चक्र क्या है?

सुदर्शन चक्र विष्णु का गोलाकार, तेजोमय, धारदार और अचूक दिव्य अस्त्र है। यह निरंतर गतिशील रहता है, मन की गति से चलता है और लक्ष्य नष्ट करके वापस लौट आता है। इसके 12 अरे और 9 नाभियाँ हैं।

सुदर्शन चक्रविष्णुदिव्य अस्त्र
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शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र कब दिया?

शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र सृष्टि के अत्यंत प्राचीन काल में दिया जब दैत्यों ने देवताओं को बंदी बना लिया था। युग का सटीक उल्लेख पुराणों में नहीं है, परंतु यह घटना सृष्टि के आदिकाल की मानी जाती है।

सुदर्शन चक्रशिव विष्णुदैत्य अत्याचार
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सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को क्यों काटा गया?

दक्ष के यज्ञ में सती ने देह त्याग किया। शिव शव उठाकर तांडव करने लगे जिससे प्रलय का खतरा हुआ। सृष्टि बचाने के लिए विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव के 51 टुकड़े किए — जहाँ गिरे वहाँ शक्तिपीठ बने।

सती शरीर51 शक्तिपीठविष्णु सुदर्शन चक्र
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सुदर्शन चक्र सूर्य की किरणों से बना था क्या?

हाँ, एक कथा के अनुसार विश्वकर्मा ने सूर्य का तेज घटाते समय निकली दिव्य धूल से सुदर्शन चक्र बनाया था। इसीलिए यह करोड़ों सूर्यों के समान प्रभावान माना जाता है।

सुदर्शन चक्रसूर्य तेजविश्वकर्मा
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विष्णु जी की गदा का नाम क्या है?

विष्णु जी की गदा का नाम 'कौमोदकी' है। यह उनके चार प्रमुख आयुधों में से एक है और चतुर्भुज विष्णु के बाएं निचले हाथ में विराजती है।

विष्णु गदाकौमोदकीगदा नाम
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सुदर्शन चक्र और त्रिशूल में कौन ज्यादा शक्तिशाली है?

दोनों ही अतुलनीय दिव्य अस्त्र हैं — त्रिशूल शिव का और सुदर्शन चक्र विष्णु का। विशेष बात यह है कि सुदर्शन चक्र स्वयं शिव ने बनाया था, इसलिए दोनों में परस्पर पूरकता है, प्रतिस्पर्धा नहीं।

सुदर्शन चक्रत्रिशूलशिव विष्णु
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विष्णु जी के चार हाथों में क्या-क्या होता है?

विष्णु के चार हाथों में — पांचजन्य शंख (पंचभूत प्रतीक), सुदर्शन चक्र (मन/न्याय प्रतीक), कौमोदकी गदा (ज्ञान-शक्ति प्रतीक) और कमल पद्म (सृष्टि-सौंदर्य प्रतीक) होते हैं।

विष्णु चतुर्भुजचार हाथशंख चक्र गदा पद्म
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कृष्ण को सुदर्शन चक्र किसने दिया?

कृष्ण विष्णु के अवतार हैं अतः यह चक्र उनका ही है। महाभारत में खांडव दहन के बदले अग्निदेव ने कृष्ण को चक्र और गदा दी। एक अन्य परंपरा में परशुराम से प्राप्त होने का उल्लेख है।

कृष्ण सुदर्शन चक्रअग्नि देवपरशुराम
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विष्णु अस्त्र शस्त्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर विष्णु अस्त्र शस्त्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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विष्णु अस्त्र शस्त्र को गहराई से समझने का तरीका

विष्णु अस्त्र शस्त्र प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

21 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

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