विस्तृत उत्तर
सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का सबसे प्रसिद्ध, सर्वाधिक शक्तिशाली और अचूक दिव्य अस्त्र है जो सभी आयुधों में श्रेष्ठ माना गया है।
सुदर्शन चक्र एक गोलाकार, तेजोमय और धारदार आयुध है। इसके किनारों पर आरी के समान तीक्ष्ण धाराएं हैं जो घूमते हुए शत्रु को नष्ट कर देती हैं। इसकी सबसे विशेष बात यह है कि एक बार छोड़ने पर यह अपने लक्ष्य को नष्ट करके स्वयं चलाने वाले के पास वापस लौट आता है।
पुराणों के अनुसार सुदर्शन चक्र सभी महाअस्त्रों में निरंतर गतिशील है — यह कभी विश्राम नहीं करता। इसे मन की गति से नियंत्रित किया जाता है। शिव पुराण में कहा गया है कि इसके बारह अरे (आरे) और नौ नाभियाँ हैं, और इसमें सूर्य-चंद्र-अग्नि-वायु आदि की शक्तियाँ समाहित हैं।
भगवान विष्णु इसे अपनी तर्जनी पर और श्रीकृष्ण इसे कनिष्ठा (छोटी उंगली) पर धारण करते थे। ब्रह्माण्ड में इस अस्त्र से बचने का कोई उपाय नहीं बताया गया। यह धर्म, न्याय और सुरक्षा का प्रतीक है।





