विस्तृत उत्तर
कौमोदकी भगवान विष्णु की दिव्य गदा है जो उनके प्रमुख चार आयुधों में से एक है। यह गदा शक्ति, दृढ़ता और अधर्म-दमन का प्रतीक है।
पौराणिक वर्णन के अनुसार कौमोदकी गदा अत्यंत भारी और विशाल है। इसकी विशेष विशेषता यह है कि जब भी इसे चलाया जाता है, यह भयंकर गर्जना उत्पन्न करती है जिससे शत्रुओं में भय व्याप्त हो जाता है। इसका प्रहार बड़े-बड़े पर्वतों और चट्टानों को भी चूर-चूर कर देता था।
महाभारत के खांडव-दहन प्रसंग में अग्निदेव ने श्रीकृष्ण को कौमोदकी गदा भेंट की थी — जब कृष्ण और अर्जुन ने अग्नि को खांडव वन जलाने में सहायता की।
यह गदा भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप में बाएं निचले हाथ में दिखाई देती है। 'कौमोदकी' नाम का अर्थ है — 'कुमुद' (जल-पुष्प) से संबंधित या जल में उत्पन्न, जो इसके समुद्र से प्राप्त होने का संकेत देता है।
गदा को पुराणों में शक्ति का सर्वोच्च भौतिक प्रतीक माना गया है — जो बल, पराक्रम और अधर्म के दमन की क्षमता दर्शाती है।





