विस्तृत उत्तर
सुदर्शन चक्र की संरचना के विषय में शिव पुराण में भगवान शिव के वचनों में विस्तृत वर्णन मिलता है।
शिव पुराण के अनुसार जब शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र दिया, तब उन्होंने कहा — 'इसके बारह अरे (आरे) और नौ नाभियाँ हैं।' इस प्रकार सुदर्शन चक्र में 12 अरे (Spokes) और 9 नाभियाँ हैं।
इन 12 अरों में द्वादश देवता, 12 राशियाँ, 12 मास (चैत्र से फाल्गुन) और छहों ऋतुएं समाहित हैं। इसमें सूर्य, चंद्र, अग्नि, वरुण, इंद्र, विश्वेदेव, प्रजापति, वायु, धन्वंतरि, अश्विनीकुमार, तप और उग्रतप — ये बारह देव-शक्तियाँ निहित हैं।
इसके अतिरिक्त कुछ ग्रंथों में 108 धाराओं का भी उल्लेख मिलता है। 108 की संख्या ब्रह्माण्ड के हर कोण तक पहुँचने की क्षमता का प्रतीक है।
इस प्रकार सुदर्शन चक्र की संरचना ब्रह्माण्ड के काल-चक्र (12 मास), ग्रह-मंडल (12 राशियाँ) और दैवीय शक्तियों (12 देव) का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करती है।




