विस्तृत उत्तर
शिशुपाल वध की कथा महाभारत में वर्णित है और यह कृष्ण के न्याय, धैर्य और वचन-पालन का अनुपम उदाहरण है।
शिशुपाल चेदि राज्य का राजा था और श्रीकृष्ण की बुआ का पुत्र अर्थात उनका चचेरा भाई था। जन्म के समय उसके तीन नेत्र और चार भुजाएं थीं। आकाशवाणी हुई कि जिसकी गोद में जाने से ये अतिरिक्त अंग समाप्त होंगे, वही उसका काल बनेगा। जब कृष्ण ने उसे गोद में लिया तो अतिरिक्त अंग लुप्त हो गए। बुआ ने कृष्ण से उसके 100 अपराध क्षमा करने का वचन लिया और कृष्ण ने वचन दिया।
शिशुपाल कृष्ण का शत्रु था और बार-बार उनका अपमान करता था। युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में जब कृष्ण को अग्रपूजा का सम्मान मिला, तो शिशुपाल क्रोधित हो भरी सभा में कृष्ण को 'ग्वाला', 'चोर', 'नीच' जैसे अपशब्दों से अपमानित करने लगा। कृष्ण ने शांतिपूर्वक एक-एक अपराध गिनते रहे।
जब शिशुपाल के 100 अपराध पूरे हुए और उसने 101वीं बार गाली दी, तब कृष्ण ने घोषणा की — 'मेरे बुआ को दिया वचन पूरा हुआ।' और सुदर्शन चक्र छोड़ा जिसने पलक झपकते शिशुपाल का शीश काट दिया। मृत्यु के बाद उसकी आत्मा कृष्ण में विलीन हो गई।





