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विस्तृत उत्तर
शिशुपाल के 100 अपराधों का अर्थ उसके द्वारा बार-बार भगवान कृष्ण का अपमान करना है। कथा में मुख्य रूप से यह बताया गया है कि कृष्ण ने उसकी माता को वचन दिया था कि वे उसके सौ अपराध क्षमा करेंगे। राजसूय यज्ञ में शिशुपाल ने कृष्ण को प्रथम पूज्य मानने का विरोध किया और सभा में उन्हें अपशब्द कहे। ग्रंथों में हर अपराध की अलग सूची देने से अधिक जोर इस बात पर है कि भगवान ने धैर्यपूर्वक सीमा तक क्षमा की। जब उसने 101वाँ अपराध किया, तब सुदर्शन चक्र से उसका वध हुआ।
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