विस्तृत उत्तर
माता सती के शरीर को सुदर्शन चक्र से काटने की घटना 51 शक्तिपीठों की उत्पत्ति से जुड़ी है और यह विष्णु की सृष्टि-रक्षा की सबसे महत्वपूर्ण लीलाओं में से एक है।
कथा के अनुसार दक्ष प्रजापति ने एक महायज्ञ आयोजित किया जिसमें जानबूझकर शिव को आमंत्रित नहीं किया। माता सती बिना निमंत्रण के यज्ञ में गईं जहाँ दक्ष ने शिव का घोर अपमान किया। यह अपमान सहन न कर सकने पर माता सती ने योगाग्नि से अपना शरीर त्याग दिया।
जब भगवान शिव को यह समाचार मिला, वे अत्यंत शोकाकुल हो गए। सती के शव को कंधे पर उठाकर वे तांडव करते हुए तीनों लोकों में भटकने लगे। उनका तांडव इतना प्रचंड था कि पृथ्वी पर प्रलय का खतरा उत्पन्न हो गया — सृष्टि असंतुलित होने लगी।
सृष्टि को बचाने के लिए सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। तब विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव के 51 टुकड़े किए। शिव के तांडव की लय में जब-जब पैर पटकते, विष्णु एक-एक अंग काटकर गिराते गए। जहाँ-जहाँ सती के अंग, वस्त्र या आभूषण गिरे, वहाँ-वहाँ एक शक्तिपीठ की स्थापना हुई — इस प्रकार 51 महाशक्तिपीठ अस्तित्व में आए।





