विस्तृत उत्तर
शिव के शोक-तांडव से उत्पन्न संकट को टालने के लिए भगवान विष्णु ने यह कठिन किंतु आवश्यक निर्णय लिया।
कारण — शिव सती के शव को कंधे पर उठाकर तांडव कर रहे थे और उनके क्रोध एवं विरह से पृथ्वी पर प्रलय का खतरा बढ़ता जा रहा था। देवताओं ने विष्णु से इस विनाश को रोकने का अनुरोध किया।
विष्णु का उद्देश्य — सृष्टि की रक्षा करना था। जब तक सती का शव शिव के कंधे पर था तब तक शिव भटकते और तांडव करते रहते। शव के खंडित होने पर शिव की भटकन और उससे उत्पन्न प्रलय का खतरा दोनों समाप्त होते।
शक्तिपीठों का निर्माण — विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव को 51 खंडों में काटा। वे खंड पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर गिरे। देवी पुराण के अनुसार जहाँ-जहाँ सती के अंग या आभूषण गिरे वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ स्थापित हुई। यह विष्णु की 'कठोर करुणा' का उदाहरण है — पीड़ा देकर सृष्टि को बचाना।





