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देवी तीर्थ📜 कालिका पुराण, कामाख्या मंदिर परंपरा, शाक्त तंत्र2 मिनट पठन

कामाख्या मंदिर में अम्बुबाची मेला का क्या महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

अम्बुबाची = कामाख्या देवी का वार्षिक रजस्वला काल (आषाढ़, 3 दिन)। कालिका पुराण: सती योनि भाग यहां गिरा। मंदिर 3 दिन बंद → चौथे दिन रक्त-वस्त्र प्रसाद। महत्व: स्त्री शक्ति सम्मान, तांत्रिक साधना का सर्वोत्तम काल, सृष्टि उर्वरता प्रतीक। कोई मूर्ति नहीं — योनि शिलाखंड पूजित।

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विस्तृत उत्तर

कामाख्या मंदिर (गुवाहाटी, असम) में अम्बुबाची मेला वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है।

अम्बुबाची का अर्थ

अम्बुबाची' = देवी कामाख्या का वार्षिक रजस्वला (मासिक धर्म) काल। यह आषाढ़ मास (जून-जुलाई) में 3 दिन मनाया जाता है। इन तीन दिनों में मंदिर पूर्णतः बंद रहता है।

शास्त्रीय आधार (कालिका पुराण)

कामाख्या शक्तिपीठ पर सती माता का योनि भाग गिरा था। मान्यता है कि प्रतिवर्ष आषाढ़ मास में देवी रजस्वला होती हैं — यह सृष्टि की उर्वरता और स्त्री शक्ति का प्रतीक है।

महत्व

  1. 1स्त्री शक्ति का सम्मान: अम्बुबाची स्त्री के मासिक धर्म को पवित्र और दैवीय मानता है — यह उस प्राचीन शाक्त परंपरा का प्रतीक है जो स्त्री की सृजन शक्ति को पूजनीय मानती है।
  2. 2तांत्रिक साधना: अम्बुबाची के तीन दिन तांत्रिक साधना का सर्वोत्तम काल माना गया है। देश भर से तांत्रिक, अघोरी और साधक इन दिनों कामाख्या आते हैं।
  3. 3अम्बुबाची वस्त्र: मंदिर खुलने पर (चौथे दिन) देवी के लाल वस्त्र (रक्त-वस्त्र) भक्तों में प्रसाद रूप में बांटे जाते हैं — इसे अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
  4. 4सृष्टि उर्वरता: यह उत्सव पृथ्वी की उर्वरता और वर्षा ऋतु के आगमन से भी जुड़ा है।

विशेष: कामाख्या मंदिर में कोई मूर्ति नहीं — योनि आकार का शिलाखंड पूजित है, जो रक्तवर्ण वस्त्र से ढका रहता है।

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शास्त्रीय स्रोत
कालिका पुराण, कामाख्या मंदिर परंपरा, शाक्त तंत्र
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