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देवी तीर्थ📜 मार्कण्डेय पुराण, देवी भागवत, विन्ध्यवासिनी परंपरा1 मिनट पठन

विन्ध्यवासिनी देवी की पूजा कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

विन्ध्यवासिनी = योगमाया (विष्णु माया शक्ति), विन्ध्याचल (मिर्जापुर) में विराजमान। तीन मंदिर: विन्ध्यवासिनी+काली खोह+अष्टभुजा = यात्रा पूर्ण। लाल चुनरी, पुष्प, नारियल, सिंदूर। 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं विन्ध्यवासिन्यै नमः'। नवरात्रि विशेष।

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विस्तृत उत्तर

विन्ध्यवासिनी देवी विन्ध्याचल (मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश) में विराजमान माता दुर्गा का प्रसिद्ध रूप हैं। यह देवी भागवत में वर्णित अत्यंत महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है।

विन्ध्यवासिनी कौन हैं

मार्कण्डेय पुराण/देवी भागवत: जब कंस श्रीकृष्ण को मारना चाहता था, तब योगमाया (विष्णु की माया शक्ति) ने वसुदेव-देवकी की पुत्री रूप में जन्म लिया। कंस ने जब इस कन्या को पटकना चाहा तो वह आकाश में उड़ गई और विन्ध्याचल पर्वत पर स्थापित हो गई — तभी से 'विन्ध्यवासिनी' नाम पड़ा।

पूजा विधि

  1. 1विन्ध्याचल में तीन मंदिर प्रमुख: विन्ध्यवासिनी, काली खोह, अष्टभुजा — तीनों के दर्शन से यात्रा पूर्ण।
  2. 2स्नान कर शुद्ध वस्त्र → मंदिर में दर्शन।
  3. 3लाल चुनरी, लाल पुष्प, नारियल, सिंदूर अर्पित।
  4. 4'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं विन्ध्यवासिन्यै नमः' मंत्र जप।
  5. 5विन्ध्येश्वरी चालीसा/स्तोत्र पाठ।
  6. 6नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) में विशेष मेला और पूजा।

फल: सर्व मनोकामना पूर्ति, भय निवारण, शत्रु नाश, संतान सुख।

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शास्त्रीय स्रोत
मार्कण्डेय पुराण, देवी भागवत, विन्ध्यवासिनी परंपरा
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