विस्तृत उत्तर
विन्ध्यवासिनी देवी विन्ध्याचल (मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश) में विराजमान माता दुर्गा का प्रसिद्ध रूप हैं। यह देवी भागवत में वर्णित अत्यंत महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है।
विन्ध्यवासिनी कौन हैं
मार्कण्डेय पुराण/देवी भागवत: जब कंस श्रीकृष्ण को मारना चाहता था, तब योगमाया (विष्णु की माया शक्ति) ने वसुदेव-देवकी की पुत्री रूप में जन्म लिया। कंस ने जब इस कन्या को पटकना चाहा तो वह आकाश में उड़ गई और विन्ध्याचल पर्वत पर स्थापित हो गई — तभी से 'विन्ध्यवासिनी' नाम पड़ा।
पूजा विधि
- 1विन्ध्याचल में तीन मंदिर प्रमुख: विन्ध्यवासिनी, काली खोह, अष्टभुजा — तीनों के दर्शन से यात्रा पूर्ण।
- 2स्नान कर शुद्ध वस्त्र → मंदिर में दर्शन।
- 3लाल चुनरी, लाल पुष्प, नारियल, सिंदूर अर्पित।
- 4'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं विन्ध्यवासिन्यै नमः' मंत्र जप।
- 5विन्ध्येश्वरी चालीसा/स्तोत्र पाठ।
- 6नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) में विशेष मेला और पूजा।
फल: सर्व मनोकामना पूर्ति, भय निवारण, शत्रु नाश, संतान सुख।





