विस्तृत उत्तर
वीरभद्र शिव के करोड़ों प्रमथगणों के साथ तेजी से दक्ष के यज्ञ-स्थल पहुँचे। उनके प्रस्थान से पहले ही दक्ष और देवताओं को अनेक अपशकुन दिखने लगे — बाईं आँख फड़कना, धरती काँपना, दिन में तारे दिखना और सूर्यमंडल पर घेरे पड़ना। आकाश-वाणी ने भी दक्ष के पापों का उद्घाटन किया।
यज्ञ-विध्वंस — वीरभद्र यज्ञशाला पहुँचे और यज्ञ को तहस-नहस कर दिया। जिन देवताओं ने शिव का अपमान किया था उन्हें दंडित किया। भगवान विष्णु ने भी प्रतिरोध किया परंतु वीरभद्र की शक्ति देखकर वे अंतर्धान हो गए। वीरभद्र ने यज्ञ-भूमि को रक्त से लाल कर दिया।
दक्ष का वध — अंत में वीरभद्र ने राजा दक्ष को पकड़कर उनका सिर धड़ से अलग कर दिया। इस घटना का वर्णन स्कंद पुराण, शिव पुराण और देवी पुराण सहित अनेक पुराणों में है।
यज्ञ-विध्वंस के बाद ऋषि-मुनियों और देवताओं में हाहाकार मच गया और वे ब्रह्मा-विष्णु से शिव को शांत कराने की प्रार्थना करने लगे।





