विस्तृत उत्तर
सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी के वियोग में अत्यंत व्याकुल हो उठे। यह प्रसंग शिव के मानवीय और प्रेमपूर्ण स्वरूप को दर्शाता है।
कारण — शिव सर्वशक्तिमान देव हैं परंतु सती उनकी परम-प्रिया और आदि-शक्ति थीं। सती की मृत्यु शिव के लिए अकल्पनीय वेदना थी। शिव पुराण के अनुसार शिव लौकिक पुरुष की भाँति विलाप करते हैं और सती के शव को सिर पर धारण कर विक्षिप्त की तरह भटकने लगे।
शव को कंधे पर उठाकर — शिव यज्ञ-कुंड से सती के शव को निकालकर अपने कंधे पर उठा लिए और दुखी होकर पृथ्वी पर इधर-उधर भटकते हुए विरह-तांडव करने लगे। वे अपनी प्रिया को छोड़ने से इनकार करते रहे।
शाश्वत संदेश — यह प्रसंग बताता है कि परमात्मा भी प्रेम की शक्ति के अधीन हो जाते हैं। शिव का यह विरह-तांडव आध्यात्मिक प्रेम की पराकाष्ठा का चित्रण है। अंततः विष्णु के हस्तक्षेप से सती के शव के टुकड़े हुए और शिव की भटकन समाप्त हुई।
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