विस्तृत उत्तर
शिव तांडव स्तोत्र की रचना और उससे जुड़ी कथा शिव पुराण और परंपरागत ग्रंथों में वर्णित है:
रचनाकार: लंकेश रावण
शिव तांडव स्तोत्र लंका के राजा रावण ने रचा था। रावण शिव का महाभक्त था — वह ब्राह्मण, वेदज्ञ, महापंडित और शिव उपासक था।
तांडव स्तोत्र की रचना की कथा
परंपरागत कथा के अनुसार — रावण ने कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया। शिव ने अपने अंगूठे से कैलाश को दबाया और रावण उसके नीचे दब गया। पीड़ा से व्याकुल रावण ने शिव की स्तुति में यह स्तोत्र गाया। शिव प्रसन्न हुए और रावण को मुक्त किया — साथ ही चंद्रहास तलवार प्रदान की।
शिव तांडव स्तोत्र की विशेषताएं
- ▸श्लोक संख्या: 15 श्लोक + 1 फलश्रुति
- ▸छंद: अत्यंत गतिशील और उग्र ताल
- ▸भाषा: संस्कृत — अत्यंत प्रवाहमय और संगीतात्मक
- ▸प्रथम श्लोक:
> 'जटाटवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्।'
'तांडव' का अर्थ
तांडव शिव का नृत्य है। इसके दो रूप:
- 1आनंद तांडव — आनंद और सृष्टि का नृत्य (नटराज रूप)
- 2रुद्र तांडव (प्रलय तांडव) — प्रलय के समय
रावण की शिव भक्ति
शिव पुराण में रावण को शिव का परम भक्त बताया गया है। रावण ने अपनी दस भुजाओं से वीणा बनाई और अपनी अंतड़ियों की तारें लगाकर शिव स्तुति गाई — यह उसकी अत्यंत भक्ति का प्रतीक था।
पाठ का फल
शिव तांडव स्तोत्र का पाठ शिव की कृपा, भय नाश और शत्रुओं पर विजय के लिए किया जाता है।





