विस्तृत उत्तर
शिव तांडव स्तोत्र की रचना लंकाधिपति रावण ने की थी।
कथा
रावण एक महान शिवभक्त था। एक बार जब रावण ने कैलाश पर्वत उठाने का प्रयास किया, तब भगवान शिव ने अपने अंगूठे से पर्वत को दबा दिया। इससे रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया। रावण ने असहनीय पीड़ा में शिव की स्तुति के रूप में तांडव स्तोत्र की रचना की।
स्तोत्र की विशेषता
- ▸15 श्लोकों का यह स्तोत्र संस्कृत का सर्वाधिक शक्तिशाली और लयबद्ध स्तोत्र माना जाता है
- ▸इसकी छंद शैली 'द्रुत विलम्बित' या 'जलोद्धतगति' है
- ▸इसमें शिव के तांडव नृत्य का अद्भुत वर्णन है
- ▸'जटाटवीगलज्जलप्रवाह...' — इसकी प्रथम पंक्ति है
ऐतिहासिक महत्व
रावण शिव पुराण में 'परम शिव भक्त' के रूप में वर्णित है। उसने शिव की स्तुति में अनेक स्तोत्रों की रचना की जिनमें 'शिव तांडव स्तोत्र' सर्वश्रेष्ठ है।
पाठ का फल: शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से शत्रु भय, रोग, दरिद्रता का नाश होता है और शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।





