विस्तृत उत्तर
कामदेव के भस्म होने की कथा शिव पुराण, स्कंद पुराण और भागवत पुराण में वर्णित है।
सीधा कारण — देवताओं के अनुरोध पर कामदेव ने भगवान शिव पर अपना 'पुष्प-बाण' चलाया। उस बाण से शिव की गहरी समाधि भंग हो गई। पार्वती की अटूट भक्ति देखकर कामदेव प्रकट हुए और तपस्या में लीन शिव पर पुष्प-बाण चला दिया।
शिव का क्रोध — अपनी समाधि भंग होने से शिव अत्यंत क्रोधित हुए। उन्होंने अपना तृतीय नेत्र खोला — उस नेत्र की अग्नि से कामदेव तत्काल भस्म हो गए।
दार्शनिक कारण — शिव वासना के नहीं, शुद्ध प्रेम के देव हैं। कामदेव प्रेम को शरीर तक सीमित रखते हैं और उसे वासना में बदलने का अवसर देते हैं। शिव की समाधि का उद्देश्य शुद्ध तप था — उसे काम-शर से भंग करने पर दंड स्वाभाविक था।





