विस्तृत उत्तर
कामदेव ने पहले अपना प्रभाव फैलाकर समस्त संसारको अपने वशमें कर लिया। सुन्दर ऋतुराज वसन्त को प्रकट किया — वनोंमें नये फूल खिले, कोयल बोलने लगीं, मधुर-सुगन्धित पवन चलने लगा। सारी सृष्टि काम के वश हो गयी।
चौपाई — 'तब आपन प्रभाउ बिस्तारा। निज बस कीन्ह सकल संसारा। कोपेउ जबहिं बारिचरकेतू। छन महुँ मिटे सकल श्रुति सेतू॥'
अर्थ — तब उसने अपना प्रभाव फैलाया और समस्त संसारको अपने वशमें कर लिया। जिस समय मछलीके चिह्नकी ध्वजावाले कामदेवने क्रोध किया, उस समय क्षणभरमें ही वेदोंकी सारी मर्यादा मिट गयी।
पर शिवजी की अचल समाधि नहीं डिगी — 'सकल कला करि कोटि बिधि हारेउ सेन समेत। चली न अचल समाधि सिव कोपेउ हृदयनिकेत॥'
अर्थ — कामदेव अपनी सेनासमेत करोड़ों प्रकारकी सब कलाएँ करके हार गया, पर शिवजीकी अचल समाधि न डिगी। तब कामदेव क्रोधित हो उठा।
अन्त में कामदेव ने आम के पेड़ की डाली पर चढ़कर अपने पुष्प-धनुष पर पाँच बाण चढ़ाये और शिवजी पर छोड़े।





