विस्तृत उत्तर
देवताओं ने शिवजी की तपस्या भंग करने के लिये कामदेव को भेजा।
बालकाण्ड में कहा — देवताओं ने सोचा कि पार्वतीजी ने शिवजीको पति बनानेके लिये तप किया है, इधर शिवजी सब छोड़-छाड़कर समाधि लगा बैठे हैं। कामदेव को शिवजी के पास भेजो, वह शिवजी के मनमें क्षोभ (विकार) उत्पन्न करे, तब हम जाकर शिवजी के चरणों में सिर नवाकर विवाह करवा देंगे।
दोहा — 'सुरन्ह कही निज बिपति सब सुनि मन कीन्ह बिचार। संभु बिरोध न कुसल मोहि बिहसि कहेउ अस मार॥'
अर्थ — देवताओंने कामदेवसे अपनी सारी विपत्ति कही। सुनकर कामदेवने मनमें विचार किया और हँसकर देवताओंसे यों कहा कि शिवजीके साथ विरोध करनेमें मेरी कुशल नहीं है।
फिर भी कामदेव ने परोपकार के लिये यह कार्य स्वीकार किया — 'तदपि करब मैं काजु तुम्हारा। श्रुति कह परम धरम उपकारा॥' — फिर भी तुम्हारा काम करूँगा, क्योंकि वेद दूसरोंके उपकारको परम धर्म कहते हैं।





