विस्तृत उत्तर
कामदेव के भस्म होने के बाद शिव की समाधि भंग हुई और उनका ध्यान पार्वती की ओर गया। परंतु शिव ने तुरंत विवाह नहीं किया — पहले परीक्षा ली।
परीक्षा का उद्देश्य — शिव यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि पार्वती की भक्ति और प्रेम वास्तविक है। शिव जानते थे कि वे वनवासी, जटाधारी और औघड़ हैं — पार्वती इन्हें सच में स्वीकार करती हैं या नहीं, यह परखना था।
परीक्षा की विधि — शिव पुराण के अनुसार शिव ने पहले सप्तर्षियों को पार्वती के पास भेजा। सप्तर्षियों ने पार्वती को शिव के औघड़ स्वभाव के विषय में बताकर परखा। फिर शिव स्वयं वटुवेश (ब्रह्मचारी का वेश) धारण कर पार्वती की परीक्षा लेने गए।
परिणाम — पार्वती परीक्षा में खरी उतरीं और शिव उनके सामने अपने असली रूप में प्रकट हुए।





