विस्तृत उत्तर
सतीजी के देहत्याग की सूचना पाकर शिवजी के गण दक्ष के यज्ञ को नष्ट करने लगे। बालकाण्ड में इसका संक्षिप्त वर्णन है।
दोहा — 'सती मरनु सुनि संभु गन लगे करन मख खीस। जग्य बिधंस बिलोकि भृगु रच्छा कीन्हि मुनीस॥'
इसका अर्थ — सतीके मरनेकी खबर सुनकर शिवजीके गण यज्ञको नष्ट करने लगे। यज्ञका विध्वंस देखकर मुनीश्वर भृगुजीने (यज्ञकी) रक्षा की।
रामचरितमानस में दक्ष यज्ञ विध्वंस का विस्तृत वर्णन नहीं है — तुलसीदासजी ने इसे संक्षेप में ही कहा है। शिव पुराण और अन्य पुराणों में इसका विस्तार से वर्णन मिलता है — जहाँ वीरभद्र ने दक्ष का सिर काटा और बाद में शिवजी ने उसे बकरे का सिर लगाकर जीवित किया।
बालकाण्ड में इसके बाद सीधे पार्वतीजी के जन्म की कथा आती है।





