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विष्णु अस्त्र शस्त्र⏱ 2 मिनट पठन

विष्णु जी को सुदर्शन चक्र कैसे मिला?

विष्णु ने कैलाश पर शिव के सहस्त्र नामों से पूजा की, एक कमल कम होने पर अपना नेत्र अर्पित किया।

संक्षिप्त उत्तर

विष्णु ने कैलाश पर शिव के सहस्त्र नामों से पूजा की, एक कमल कम होने पर अपना नेत्र अर्पित किया। इस अटूट भक्ति से शिव प्रकट हुए और अजेय सुदर्शन चक्र भेंट किया।

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विस्तृत उत्तर

भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र प्राप्त होने की घटना भक्ति, समर्पण और त्याग की एक अद्वितीय कथा है जो शिव महापुराण में वर्णित है।

जब दैत्यों के अत्याचार से तीनों लोक त्रस्त हो गए और सभी देवता विष्णु की शरण में आए, तब विष्णु जी को भी अकेले दैत्यों से लड़ने में कठिनाई हुई। उन्हें ज्ञात था कि एक अजेय शस्त्र की आवश्यकता है और वह शक्ति केवल भगवान शिव दे सकते हैं।

भगवान विष्णु ने कैलाश पर्वत पर जाकर भगवान शिव की विधिवत आराधना आरंभ की। उन्होंने शिव के सहस्त्र नामों का पाठ किया और प्रत्येक नाम के साथ एक कमल पुष्प अर्पित करने का संकल्प लिया। शिव ने परीक्षा लेने के लिए माया से एक कमल छिपा दिया।

जब विष्णु को अंतिम नाम पर एक कमल कम दिखा, वे तनिक भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने संकल्प पूर्ण करने के लिए अपना एक नेत्र ही शिवलिंग पर अर्पित कर दिया — क्योंकि वे कमलनयन हैं, उनकी आँखें ही उनके 'कमल' हैं। इस असाधारण भक्ति और समर्पण को देखकर शिव तत्काल प्रकट हुए और प्रसन्नतापूर्वक अपना सुदर्शन चक्र विष्णु को दिया। इस चक्र से विष्णु ने दैत्यों का संहार किया।

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